हरियाणा : राज्यपाल अशीम घोष का कार्यभार संभालते ही नया अध्याय शुरू, अंग्रेजी में ली शपथ

Admin
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चंडीगढ़

हरियाणा के नए राज्यपाल अशीम घोष (81) ने सोमवार को चंडीगढ़ स्थित राजभवन में पद की शपथ ली। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू ने उन्हें शपथ दिलाई। उन्होंने अपना भाषण अंग्रेजी में पढ़ा। 

शपथ ग्रहण समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी और पंजाब के गवर्नर व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी मौजूद रहे। घोष को बंडारू दत्तात्रेय की जगह राज्यपाल बनाया गया है। 14 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने उनके नाम की घोषणा की थी। घोष पश्चिम बंगाल में भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं।अशीम घोष ने अपनी नियुक्ति पर कहा- "यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। मैं पूरी ईमानदारी और लगन से हरियाणा के लोगों की सेवा करूंगा।"

नए गवर्नर अशीम घोष से जुड़ीं कुछ खास बातें ….

    वाजपेयी के चहेते थे अशीम घोष 

अशीम ने पश्चिम बंगाल में संघ और बीजेपी की जड़ें जमाने में अहम भूमिका निभाई है। अभी पश्चिम बंगाल में पार्टी के मार्गदर्शक मंडल में रहकर घोष भाजपा की नीतियों को आगे बढ़ाने का काम कर रहे थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कैबिनेट में मंत्री रहे तपन सिकंदर अशीम को राजनीति में लाए थे। वाजपेयी ने ही घोष की निपुणता को देखते हुए पश्चिम बंगाल में भाजपा की कमान सौंपी थी। पार्टी के भीतर एक बुद्धिजीवी चेहरे के रूप में घोष की पहचान है।

    भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए 

प्रो. अशीम घोष 1999 से लेकर 2002 तक पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। घोष से पहले हरियाणा के गवर्नर रहे बीरेंद्र नारायण चक्रवर्ती और हरी आनंद बरारी भी बंगाल के थे। उन्होंने जून 2013 में हावड़ा लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर उपचुनाव लड़ा था। यह सीट तृणमूल कांग्रेस की सांसद अंबिका बनर्जी के निधन के बाद खाली हुई थी। अशीम घोष उपचुनाव हार गए थे।

    20 साल से सक्रिय राजनीति से दूर 

पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ भाजपा नेता अशीम घोष को हाल ही में हरियाणा का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। घोष उत्तर कोलकाता के श्री शिक्षायतन कॉलेज में प्रोफेसर रहे हैं। उन्हें पश्चिम बंगाल भाजपा के उथल-पुथल वाले दौर में एक अनुशासित और वैचारिक रूप से स्पष्ट सोच रखने वाले बुद्धिजीवी के रूप में जाना जाता था। हालांकि उन्होंने सक्रिय राजनीति करीब 20 साल पहले छोड़ दी थी, फिर भी पार्टी में उनकी छवि एक सम्मानित और मार्गदर्शक व्यक्ति के रूप में बनी रही।

    बंडारू दत्तात्रेय की लेंगे जगह 

अशीम घोष हरियाणा के 19वें गवर्नर के रूप में बंडारू दत्तात्रेय की लेंगे जगह। बता दें कि बंडारू दत्तात्रेय के कार्यकाल के दौरान हरियाणा में कई राजनीतिक घटनाक्रम हुए हैं। पूर्व भाजपा-जजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान जजपा द्वारा समर्थन वापसी, मनोहर मंत्रिमंडल का इस्तीफा, नायब मंत्रिमंडल का गठन और प्रदेश में भाजपा की तीसरी बार बनी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह बंडारू दत्तात्रेय ने ही करवाया था।

राजभवन पहुंच चुके हैं घोष हरियाणा के नए गवर्नर अशीम घोष शनिवार को चंडीगढ़ राजभवन पहुंच गए हैं। सीएम नायब सैनी, पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने उनका चंडीगढ़ पर पहुंचने पर स्वागत किया था। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा था, हरियाणा के महान लोगों के लिए कार्य करना मेरी पहली प्राथमिकता रहेगी। मुख्यमंत्री और प्रशासन का सहयोग करूंगा, जिससे आमजन को लाभ मिल सके। यह भी मेरी जिम्मेदारी है कि विपक्ष के सुझावों को भी सुनूं।

यहां जानिए कौन-कौन रह चुका हैं हरियाणा का गवर्नर…

    धर्म वीरा (1 नवंबर 1966 – 14 सितंबर 1967) : पहले राज्यपाल धर्म वीरा लंदन में पढ़े थे। वो आईसीएस (अब आईएएस कहा जाता है) अफसर थे। वे अच्छे खिलाड़ी और पर्वतारोही थे। हिमालय का ट्रैलपास पार करने वाले पहले भारतीय भी थे।

    बीएन चक्रबर्ती (15 सितंबर 1967 – 26 मार्च 1976) : दूसरे राज्यपाल बीएन चक्रबर्ती भी आईसीएस अधिकारी रहे थे। उनकी आखिरी इच्छा के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार कुरुक्षेत्र में यूनिवर्सिटी कैंपस में किया गया था।

    रंजीत सिंह नरूला (27 मार्च 1976- 13 अगस्त 1976) : तीसरे राज्यपाल रंजीत सिंह नरूला लाहौर में पले-बड़े थे। 1974 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे। रिटायरमेंट के कुछ समय बाद ही हरियाणा के गवर्नर बने।

    जयसुख लाल (14 अगस्त 1976- 23 सितंबर 1977): चौथे राज्यपाल जयसुख लाल हाथी गुजरात के रहने वाले थे। वकील भी रहे। गुजरात सरकार में मंत्री रहे। लोकसभा में भी गए। हरियाणा के बाद पंजाब के राज्यपाल भी रहे।

    हरचरण सिंह बराड़ (24 सितंबर 1977- 9 दिसंबर 1979) : पांचवें राज्यपाल बने हरचरण सिंह बराड़ शुरू से ही राजनेता थे। दिलचस्प है कि वे ऐसे नेता थे जो राज्यपाल बनने के बाद भी सक्रिय राजनीति में लौटे और पंजाब के मुख्यमंत्री बने।

    सुरजीत सिंह संधवालिया (10 दिसंबर 1979- 27 फरवरी 1980 ): छठे राज्यपाल बने सुरजीत सिंह संधवालिया भी लायलपुर (अब पाकिस्तान) से थे। 1978 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे। दिलचस्प है कि 1979-80 में हरियाणा के एक्टिंग गवर्नर रहे। उसके बाद फिर पटना हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस रहे।

    गणपति राव देवजी तपासे (28 फरवरी 1980- 13 जून 1984) : सातवें राज्यपाल गणपति राव देवजी तपासे पुणे से थे। भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया था। हरियाणा का राज्यपाल रहते ताऊ देवीलाल से विवाद की वजह से वह सुर्खियों में रहे थे। 1982 के चुनाव में किसी दल को बहुमत नहीं मिला था। फैसला राज्यपाल के विवेक पर निर्भर था। तब तपासे ने भजनलाल को सीएम पद की शपथ दिला थी। इससे नाराज लोकदल नेता देवीलाल ने राज्यपाल पर हाथ छोड़ दिया था।

    सैयद मुजफ्फर हुसैन बर्नी (14 जून 1984- 21 फरवरी 1988) : 8वें राज्यपाल सैयद मुजफ्फर हुसैन बर्नी आईएएस अधिकारी थे। उन्हें लिखने का खूब शौक था और उर्दू के अलावा इंग्लिश में कई किताबें लिखीं। राज्यपाल के अलावा वो अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन रहे।

    हरि आनंद बरारी (22 फरवरी 1988- 6 फरवरी 1990) : 9वें राज्यपाल हरि आनंद बरारी IPS अधिकारी बनने से सेंट्रल कलकत्ता (अब कोलकाता) कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाते थे। इंटेलिजेंस ब्यूरो को चीफ रहे थे। योग व खेलने के शौकीन बरारी ने हरियाणा राजभवन में टेनिस कोर्ट बनवाया था।
    धनिक लाल मंडल (7 फरवरी 1990 – 13 जून 1995) : 10वें राज्यपाल धनिक लाल मंडल बिहार से थे। छात्र जीवन से ही राजनीति में आए। जयप्रकाश नारायण (जेपी) के टोटल रिवोल्यूशन (संपूर्ण क्रांति) में भाग लिया था। राज्यपाल रहने के बाद वे फिर सक्रिय राजनीति में लौट गए थे।
    महाबीर प्रसाद (14 जून 1995- 18 जून 2000) : 11वें राज्यपाल महाबीर प्रसाद यूपी के थे और गांव का सरपंच बनने से राजनीतिक सफर शुरू किया था।
    बाबू परमानंद (19 जून 2000- 1 जुलाई 2004): 12वें राज्यपाल बाबू परमानंद जम्मू-कश्मीर से थे। फारूख अब्दुला सरकार में वित्त मंत्री रहे।
    ओम प्रकाश वर्मा (20 मार्च 1937 – 8 दिसंबर 2015) : वर्मा 2003-04 में पंजाब के राज्यपाल रहे। उन्होंने करीब पांच दिन के लिए हरियाणा के कार्यवाहक राज्यपाल का कार्यभार भी संभाला था। वे केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और हिमाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के गढ़मुक्तेश्वर में हुआ था।

    एआर किदवई (7 जुलाई 2004- 27 जुलाई 2009) : 13वें राज्यपाल एआर किदवई जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी के अलावा अमेरिका से पढ़े थे। अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रहे। कई देशों की यात्रा की।

    जगन्नाथ पहाड़िया (27 जुलाई 2009- 26 जुलाई 2014): 14वें राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया राजस्थान से थे। उन्होंने दुनिया के 27 देशों की यात्रा की थी। 19 मई 2021 को कोविड-19 से उनका निधन हो गया।

    कप्तान सिंह सोलंकी (27 जुलाई 2014- 21 अगस्त 2018): 15वें राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी रहे। उनका जन्म मध्य प्रदेश के भिंड जिले में हुआ था। उन्होंने हरियाणा का राज्यपाल रहते पंजाब व हिमाचल के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाला था।
    सत्यदेव नारायण आर्य (22 अगस्त 2018- 7 जुलाई 2021) : राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य बिहार के नालंदा से थे। वह आर्य समाज के अनुयायी रहे। बिहार के पूर्व खान और भूविज्ञान मंत्री रहे।

    बंडारू दत्तात्रेय (7 जुलाई 2021- जुलाई 2025 तक) : हैदराबाद में जन्मे दत्तात्रेय 1965 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हुए और आपातकाल के दौरान जेल गए। 1991 में पहली बार सिकंदराबाद निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए ।

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