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मुख्यमंत्री ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर में ‘विकसित भारत-विकसित उ0प्र0/2047’ विजन पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित किया

aagaaztimesnews
12 Min Read

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इमर्जिंग टेक्नोलॉजी हमारे कार्यां तथा गति को नई उड़ान दे सकती है। इसी सन्दर्भ में आत्मनिर्भर भारत एवं विकसित भारत के निर्माण का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि हमें इमर्जिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ना होगा। प्रत्येक क्षेत्र में इसके प्रयोग की सम्भावना है। टेक्नोलॉजी युवाओं के जीवन को कैसे स्पीड-अप कर सकती है, यह इमर्जिंग टेक्नोलॉजी के वर्तमान गति को देखकर अनुमान लगाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर में ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश/2047’ विजन पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित किया। इसके पूर्व, मुख्यमंत्री तथा टाटा संस व टाटा समूह के चेयरमैन श्री एन0 चन्द्रशेखरन ने विश्वविद्यालय के ‘पंचकर्म केन्द्र’ का निरीक्षण किया तथा हैकाथॉन, साइबर सिक्योरिटी ए0आई0 हैकाथॉन के विजेता प्रतिभागियों को प्रतीकात्मक चेक व प्रमाण-पत्र तथा पुरस्कार देकर सम्मानित किया। उन्होंने ‘ए0आई0 अवेयरनेस फॉर ऑल’ कार्यक्रम में योगदान देने वाले विद्यार्थियों तथा ‘ए0आई0 फॉर फार्मर्स’ प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वाले किसानों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री जी के समक्ष, महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर एवं सेण्टर ऑफ मेडिकल इनोवेशन-गवर्नमेण्ट इन्सटीट्यूट ऑफ मेडिकल सांइसेज़ ग्रेटर नोएडा, के साथ हुए एम0ओ0यू0 का आदान-प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी तेज गति से समाधान दे सकती है, बशर्ते उसके अनुरूप रणीनति बनाते हुए चलने की आदत डालनी पड़ेगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से वर्ष 2017 से पूर्व प्रतिवर्ष बड़े पैमाने पर मौतें होती थीं। विगत 40 वर्षों में 50 हजार से अधिक मौतें हुई। लोगों का मानना था कि यह बीमारी ठीक नहीं हो सकती। वर्ष दर वर्ष मौत के आंकड़ें बढ़ते गये, लेकिन बीमारी पर नियंत्रण नहीं हो पाया था। इस बीमारी पर नियंत्रण के लिए इससे जुड़े एक्सपर्ट से वार्ता की गयी तथा टीम के माध्यम से अलग-अलग स्थानों से डाटा कलेक्ट किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 के पश्चात राज्य सरकार ने इस बीमारी के कारण और समाधान को जानने का प्रयास किया। ए0आई0 टूल के माध्यम से पता चला कि इंसेफेलाइटिस उन क्षेत्रों में हैं, जहां स्वच्छता व शुद्धजल पेयजल का अभाव है। इस प्रकार इस बीमारी के समाधान का रास्ता मिला। उन सभी बस्तियों तथा परिवारों को चिन्हित कर प्रत्येक घर में शौचालय का निर्माण तथा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया गया। परिणामस्वरूप, आज इंसेफेलाइटिस पर प्रभावी अंकुश लगा है। 40 वर्षों में 50 हजार मौतों का आंकड़ा विगत 06 वर्षों में शून्य पर आ गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में बालिकाओं का ड्रॉप आउट रेट 19 से 20 प्रतिशत था, जो सरकार के समक्ष बड़ी चुनौती थी। राज्य सरकार ने निःशुल्क शिक्षा, यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे, स्वेटर देने के साथ ‘स्कूल चलो अभियान’ चलाया। सभी प्रकार का डाटा कलेक्ट कर ए0आई0 टूल्स से जोड़ा गया, तो ड्रॉप आउट का प्रमुख कारण विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल तथा शौचालय का अभाव सामने आया। प्रदेश सरकार ने विद्यालयों में शौचालय का निर्माण तथा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया, जिसके परिणामस्वरूप ड्रॉप आउट रेट 19 प्रतिशत से घटकर 03 प्रतिशत पर आ गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां उपस्थित किसानों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का बेहतर उपयोग किया है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के माध्यम से रियल टाइम डाटा कलेक्ट कर पता लगा सकते हैं कि किस खेत में कब और कितना फर्टिलाइजर व पानी देना है, कब गुड़ाई-कटाई करनी है। यदि किसान पहले दिन से ही ए0आई0 का उपयोग करते हैं तथा सही डाटा कलेक्ट करते हैं, तो इसके बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। उत्तर प्रदेश के किसानों ने टेक्नोलॉजी का उपयोग कर कृषि विकास दर को 07-08 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक पहुंचाया है। जिस प्रदेश में दुनिया की सबसे अधिक उर्वरा तथा 86 से 87 प्रतिशत सिंचित भूमि उपलब्ध हो, वहां आसानी से यह उपलब्धि हासिल की जा सकती है। टेक्नोलॉजी का उपयोग कर प्रदेश के किसान अच्छा लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2000 से वर्ष 2017 के बीच 17 वर्षों में उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों 02 लाख 04 हजार करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य का भुगतान हुआ था। वर्ष 2017 से वर्ष 2025 के बीच आठ से साढ़े आठ वर्षों में 03 लाख 16 हजार करोड़ रुपये के गन्ना मूल्य का भुगतान किया गया। गन्ना किसानों के खातों में वर्ष 2017 से पहले जितनी राशि नहीं गई थी, उससे आधे से भी कम समय में उससे भी 01 लाख 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रेषित की जा चुकी है।

टेक्नोलॉजी के उपयोग से गन्ना किसानों की लागत कम हुई तथा उनकी फसलों का उत्पादन बढ़ा है। सरकार के पास चीनी मिलों तथा गन्ना तौल केन्द्रों का समस्त डाटा उपलब्ध है। पहले किसान गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं होने से हताश व निराश रहते थे। आज किसान आश्वस्त हैं कि यदि गन्ना समय पर मिल तक चला गया है, तो भुगतान समय से हो जाएगा। पहले किसान पर्ची को लेकर परेशान रहते थे। हमने टेक्नोलॉजी का उपयोग कर पर्ची को ऑनलाइन कर समस्या का समाधान किया। प्रदेश में ऐसी व्यवस्था की गयी कि किसान अपने स्मार्टफोन पर ही पर्ची की जानकारी प्राप्त कर सकें। किसानों की घटतौली की समस्या का समाधान हुआ। पर्ची में दलाली बन्द हो गयी। इससे किसान उत्साहित हुए। किसानों की आमदनी भी बढ़ी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ए0आई0 का उपयोग एजुकेशन व हेल्थ जैसे क्षेत्रों में और किस प्रकार किया जा सकता है, हमें इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। यहां गवर्नमेण्ट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, ग्रेटर नोएडा और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय मेडिकल कॉलेज के मध्य एक एम0ओ0य0ू भी हुआ है। टाटा ग्रुप ने भी टेलीकंसल्टेशन और हेल्थ से जुड़े हुए कार्यक्रम को मजबूती से आगे बढ़ाया है। आज के समय में टर्शियरी हेल्थ केयर से जुड़े सेण्टरों में स्क्रीनिंग के बाद वही पेशेंट जाने चाहिए, जिन्हें ज्यादा एक्सपर्ट राय तथा क्वॉलिटी हेल्थकेयर की जरूरत है। सामान्य उपचार की आवश्यकता वाले अन्य सभी मरीजों का इलाज पी0एच0सी0, सी0एच0सी0, जिला अस्पताल तथा टेलीकन्सल्टेशन के माध्यम से होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सेण्टर ऑफ एक्सिलेन्स का उद्घाटन भी किया गया है। यहां पर लगे हुए स्टार्ट-अप्स में लोगों ने कुछ नया करके दिखाया है। यह दिखाता है कि हम नई दिशा की ओर बढ़ रहे हैं। लोगों में जिज्ञासा बढ़ी है। ड्रोन टेक्नोलॉजी किस प्रकार हमारे लिए उपयोगी हो सकती है, यह प्रधानमंत्री जी के लखपती दीदी के विजन से सीखा जा सकता है। लखपती दीदी ड्रोन के माध्यम से एक एकड़ खेत में मात्र 10 मिनट में दवा का छिड़काव कर सकती है। ड्रोन के माध्यम से इस कार्य में किसानों की सुरक्षा तथा पूरे क्षेत्र में समान रूप से दवा का छिड़काव होता है। जहां खेती में तकनीक का उपयोग होता है, वहां एक समान उपज दिखायी देती है। इसलिए तकनीक का प्रयोग करते हुए खेती में अच्छे परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल इमरजेन्सी के दौरान यदि शहरों में यदि ब्लड एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाना हो, तो ड्रोन इसके लिए बहुत उपयोगी हो सकते हैं। इसी प्रकार अन्य सामानों को भी एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में ड्रोन का उपयोग हो सकता है। डिफेन्स सेक्टर में ड्रोन की बहुत मांग बढ़ी है। कानपुर तथा नोएडा में ड्रोन टेक्नोलॉजी के सेण्टर ऑफ एक्सिलेन्स बनाये जाने का कार्य हो रहा है। आई0आई0टी, कानपुर तथा एस0जी0पी0जी0आई0, लखनऊ में मेडटेक के सेण्टर ऑफ एक्सिलेन्स विकसित किए जा रहे हैं।

एग्रीकल्चर के क्षेत्र में अनेक सेण्टर ऑफ एक्सिलेन्स विकसित हो रहे हैं। जनपद वाराणसी में इण्टरनेशनल राइस इन्स्टीट्यूट के सेण्टर ऑफ एक्सिलेन्स का विकास किया जा रहा है। पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसान प्रति हेक्टेयर 40 कुन्तल धान का उत्पादन करता था। इण्टरनेशनल राइस इन्स्टीट्यूट, वाराणसी की मदद से यह 100 कुन्तल प्रति हेक्टेयर पहुंचा है। यह तकनीक की ताकत है। इसी प्रकार आगरा में आलू, बस्ती व कन्नौज में फल और सब्जियों के सेण्टर ऑफ एक्सिलेन्स विकसित किए जा रहे हैं। इससे हमारे किसान लाभान्वित होगें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हैकाथॉन विजेताओं का सम्मान किया गया है। यह अवेयरनेस के कार्यक्रमों से लोगों को जोड़ेंगे। अन्नदाता किसानों का भी यहां सम्मान किया गया है। टाटा समूह के चेयरमैन श्री एन0 चन्द्रशेखरन का आगमन पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर प्रदेश के विकास की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए टाटा सन्स व टाटा समूह के चेयरमैन श्री एन0 चन्द्रशेखरन ने कहा कि ‘विकसित भारत एवं विकसित उत्तर प्रदेश’ जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेना उनके लिए सम्मान की बात है। यह विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश की संकल्पना को आगे बढ़ाने में मददगार होगा। आज यहां गोरखपुर में इस तरह की तकनीक के उपयोग पर चर्चा की जा रही है।

ए0आई0 उ0प्र0 के हेल्थ क्षेत्र में एक्सपर्ट की पहुंच को सुगम बनायेगी। ए0आई0 मूलभूत परिवर्तन करने वाली तकनीक है। इसमें व्यापक संभावनाएं है। यह भविष्य में प्रत्येक क्षेत्र में नवाचार, खोज, समाधान को जन्म देगी। विज्ञान, वित्त, हेल्थ केयर, फार्मा, सतत् विकास आदि में ए0आई0 नये समाधान को जन्म देगी। यह हमारा भविष्य है। ए0आई0 का सबसे बड़ा प्रभाव हेल्थ क्षेत्र में पड़ेगा। ए0आई0 के माध्यम से विभिन्न प्रकार की नई दवाओं की खोज की जा सकती है। ए0आई0 कैंसर जैसे रोगों के इलाज में भी नये समाधानों की खोज में सहायक सिद्ध होगी।

कार्यक्रम को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर के कुलपति डॉ0 सुरेन्द्र सिंह ने भी सम्बोधित किया।

इस अवसर पर सांसद रवि किशन शुक्ल, विधायक प्रदीप शुक्ल, विधान परिषद सदस्य डॉ0 धर्मेन्द्र सिंह, गोरखपुर के महापौर डॉ0 मंगलेश श्रीवास्तव, टी0सी0एस0 आई0ऑन के ग्लोबल हेड वेंगुस्वामी रामास्वामी, टी0सी0एस0 डिजिटल के ग्लोबल हेड सी0एम0 मलाड़ी, डायरेक्टर सी0आई0पी0-साउथ एशिया रीजनल सेण्टर एण्ड रीजनल डायरेक्टर सी0आई0पी0 साउथ एशिया इन्टरनेशनल पोटैटो सेण्टर, आगरा डॉ0 सुधांशु सिंह, टी0सी0एस0 के सी0ई0ओ0 के0 कृत्तिवासन्, सलाहकार मुख्यमंत्री अवनीश कुमार अवस्थी, गवर्नमेण्ट इन्स्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, ग्रेटर नोएडा के डायरेक्टर डॉ0 राकेश कुमार गुप्ता, गोरखनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर की प्रिंसिपल डॉ0 वर्षा मोखासी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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