sonbahis girişsonbahissonbahis güncelgameofbetvdcasinomatbetgrandpashabetgrandpashabetエクスネスgiftcardmall/mygiftcasibomcasibom girişjojobetjojobet girişroketbet girişbetciobetcio girişbahiscasinobahiscasino girişkulisbetkulisbet girişultrabetultrabet girişholiganbetholiganbet girişteosbetteosbetceltabetceltabet girişalobetalobet girişromabetromabet girişbetciobetcio girişroketbetroketbet girişbahiscasinobahiscasino girişkulisbetkulisbet girişultrabetultrabet girişholiganbetholiganbet girişteosbetteosbet girişceltabetceltabet girişalobetalobet girişavvabetavvabet girişbelugabahisbelugabahis girişbetcupbetcup girişbetebetbetebet girişbetpasbetpas girişbetvolebetvole girişelexbetelexbet girişimajbetimajbet girişperabetperabet girişinterbahisinterbahis girişlidyabetlidyabet girişlimanbetlimanbet girişalobetalobet girişromabetromabet girişgalabetgalabet girişroketbetroketbet girişultrabetultrabet girişavrupabetavrupabet girişenjoybetenjoybet girişatmbahisatmbahis girişbetgarbetgar girişbetnano girişbetnanoeditörbeteditörbet girişbetkolikbetkolik girişprensbetprensbet girişsetrabetsetrabet girişbetnisbetnis girişalobetalobet girişromabetromabet girişultrabetultrabet girişroketbetroketbet girişgalabetgalabet girişavrupabetavrupabet girişenjoybetenjoybet girişatmbahis girişbetgarbetgar girişbetnanobetnano girişeditörbeteditörbet girişbetkolikbetkolik girişprensbetprensbet girişsetrabetsetrabet girişbetnisbetnis girişjojobetjojobet girişjojobetjojobet girişholiganbetholiganbet girişholiganbetholiganbet girişmarsbahismarsbahis girişmarsbahismarsbahis girişlunabetlunabet girişlunabetlunabet girişmatbetmatbet girişmatbetmatbet girişnakitbahisnakitbahis girişnakitbahis girişnakitbahiskingroyalkingroyal girişkingroyalkingroyal girişmeritkingmeritking girişmeritkingmeritkingmeritking girişbetciomarsbahismarsbahis girişmeritkingmeritking girişjojobetjojobet girişcasibomcasibompusulabetpusulabet girişholiganbetholiganbet girişmeritkingmeritking girişmeritkingmeritking girişmeritkingmeritking girişjojobetjojobetjojobetjojobet girişjojobetjojobet girişkingroyalkingroyal girişkingroyalkingroyal girişkingroyalkingroyal girişmarsbahismarsbahismarsbahis girişmarsbahismarsbahis girişmarsbahismeritkingmeritking girişjojobetjojobet girişpusulabetpusulabet girişholiganbetholiganbet girişkingroyalkingroyal girişmarsbahismarsbahis girişmeritkingmeritking girişjojobetjojobet girişkingroyalkingroyal girişmarsbahismarsbahis girişmeritkingmeritking girişcasibomcasibom girişalobetalobetromabetromabetroketbetroketbetkulisbetkulisbeteditörbeteditörbetbahiscasinobahiscasinoultrabetultrabetceltabetceltrabetbetzulabetzulabetciobetciobetcioromabetbahiscasinoeditörbetalobetroketbetkulisbetultrabetceltabetbetzulabetmarinobetmarinohiltonbethiltonbetgalabetgalabetmaksibetmaksibetnorabahisnorabahisbetyapbetyap girişbetciobetcio girişpashagamingpashagaming girişcasinoroyalcasinoroyal girişteosbetteosbet girişteosbetteosbet girişbetrabetra girişbetnisbetnis girişenjoybetenjoybet girişorisbetorisbet girişjokerbetjokerbet girişbetparibubetparibu girişbetgarbetgar girişsüratbetsüratbet girişbetbigo girişbetbigobetkolikbetkolik girişmeritkingmeritking girişjojobetjojobet girişpusulabetpusulabet girişholiganbetholiganbet girişkingroyalkingroyal girişmarsbahismarsbahis girişkingroyalkingroyal girişmeritkingmeritking girişholiganbetholiganbet girişparibuparibu giriş

गुरु पूर्णिमा पर खंडवा में निभाई जा रही ‘अतिथि देवो भव:’ की परंपरा, दिखी संस्कृति की झलक

Admin
9 Min Read

 खंडवा 

खंडवा निमाड़ की वह धरती है जहां पर पत्रकारिता के माखनलाल चतुर्वेदी , कलाकार किशोर कुमार और खंडवा के सबसे बड़े दादाजी केशवानंद महाराज हरिहरानंद महाराज कि यहां पर समाधि है जहां पर लाखों की संख्या में गुरु पूर्णिमा पर दादा जी महाराज के भक्त हजारों किलो .मीटर से नंगे पांव निशान रथ लेकर दर्शन के लिए खंडवा पहुंचते हैं दादाजी महाराज के दरबार में वही पर भक्तों के  लिए निशुल्क खंडवा पहुंचने पर अनेक प्रकार के भोजन के लिए स्टॉल लगाए जाते हैं और खंडवा शहर के तमाम लोगों द्वारा भक्ति भाव से 2 दिन तक आने वाले लाखों की संख्या में भक्तों की सेवा करते हैं और यहां तक पूरा खंडवा शहर भक्ति भाव में डूब जाता है और बडे पैमाने पर भंडारे भी किए जाते हैं लेकिन इस बीच एक अनोठी भक्ति भी देखने को मिली जहां पर एक भक्त 12 से अधिक प्रजाति के फूल और फल वाले पौधे भी बांटते नजर आया जहां पर हर एक श्रद्धालु लाइन में लगकर पौधे लेते नजर आए

गुरु पूर्णिमा के मौके पर खंडवा में अतिथि देवो भव: की परंपरा निभाई जा रही है। दादा जी धूनीवाले के दरबार में आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो, इसका यहां पूरा ध्यान रखा जा रहा है। यहां आने वालों के लिए खाना-पीना पूरी तरह से फ्री है।

यहां 500 से ज्यादा भंडारों में नाश्ता-भोजन परोसा जा रहा है। हर पंडाल में खाने को कुछ अलग है। यानी कह सकते हैं कि यहां 56 प्रकार के व्यंजन भक्तों को परोसे जा रहे हैं। इन भंडारों को मजदूर, हम्माल, अफसर-कर्मचारी से लेकर कारोबारी तक संचालित कर रहे हैं।

रोचक है भंडारे के शुरुआत की कहानी

भंडारे के शुरुआत की कहानी भी बहुत रोचक है। यहां रहने वाले बताते हैं कि 34 साल पहले अतिथि देवो भव: की परंपरा की शुरुआत एक घटना से हुई थी। पहले बाहर से आए भक्त भोजन के लिए होटल पर निर्भर रहते थे। इस दौरान 1991 में एक भक्त यहां दादाजी दरबार दर्शन करने पहुंचा, उसके पास रुपए नहीं थे।

भूख लगी तो होटल में खाना खाने पहुंचा। यहां दुकानदार ने भक्त को अपमानित किया। यहां मौजूद दादा जी के भक्तों ने यह देखा, उन्हें अच्छा नहीं लगा। इसके बाद 1992 से यहां भंडारे की शुरुआत हुई, जो अब सैकड़ों स्टॉल तक पहुंच चुका है।

कुंभ में भंडारा देख खंडवा में की शुरुआत

गणेश गोशाला समिति के सचिव रामचंद्र मौर्य ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में भक्त निशान लेकर दादा जी के दरबार में पहुंचते हैं। सबसे बड़ी तादाद में छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, महाराष्ट्र और गुजरात के भक्तों की आवाजाही रहती है। इनकी भक्ति को देखकर पूरा शहर इनकी सेवा और सत्कार के लिए उमड़ता है।

शहर में बजरंग दल ने 34 साल पहले दादाजी मंदिर के पास भंडारा शुरू किया था। जिले से बजरंग दल के 2300 कार्यकर्ता 1992 में उज्जैन कुंभ मेले गए थे, तब वहां श्रद्धालुओं को चाय, पोहे व प्रसादी भंडारे में दी जा रही थी।

वहीं से प्रेरणा लेकर खंडवा में भंडारों की शुरुआत हुई। एक भंडारा शुरू होने के बाद इनकी संख्या 4 से 5 हुई। आज शहर में 500 से अधिक भंडारों में पूड़ी-सब्जी से लेकर 56 से भी ज्यादा पकवान परोसे जाते हैं।

कई सदस्यों की दूसरी पीढ़ी कर रही भंडारों में सहयोग

कमल यूथ क्लब के सतनाम सिंह होरा ने बताया कि क्लब द्वारा पहले जय अंबे चौक पर फरियाली खिचड़ी का वितरण किया जाता था, लेकिन भोजन की व्यवस्था नहीं होने पर क्लब ने भी श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था शुरू की। क्लब में ऐसे सदस्य भी हैं, जिनकी दूसरी पीढ़ी भंडारे में सहयोग कर रही है। क्लब में 140 सदस्य हैं। इसकी शुरुआत 7 लोगों ने कीं, लेकिन आज कई नए सदस्य जुड़कर सेवा दे रहे हैं।

28 साल पहले नाश्ते से शुरुआत, अब गुलाब जामुन बांट रहे

दादाजी मंदिर मार्ग पर अंजनी बालाजी नगर के सामने दादाजी सेवा मंडली ने स्टॉल लगाया है। यहां दादाजी भक्तों को गुलाब जामुन बांटे जा रहे हैं। आयोजक साधुराम अग्रवाल बताते हैं कि, इस स्टॉल को 28 साल हो गए हैं। शुरुआत में पोहा बांटते थे, अब यह सिलसिला मिठाई तक पहुंच गया है। पहले आईस्क्रीम और बालूसाई भी बांट चुके हैं।

कलेक्ट्रेट, आरटीओ, एनएचएआई विभाग का भी स्टॉल

निजी संस्थानों के साथ सरकारी विभाग के भी यहां स्टॉल लगे हुए हैं। इनमें आरटीओ विभाग तो पिछले 19 साल से भंडारे का आयोजन कर रहा है। जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी भी स्टॉल लगाकर सेवा कर रहे हैं। विपणन संघ सब्जी-पुड़ी बांट रहा है। एनएचएआई ने भी थाना पदमनगर के सामने स्टॉल लगाया है।

मोहल्ले का ग्रुप परोस रहा जलेबी और भजिए

आनंद नगर क्षेत्र में पारस स्टेशनरी के पास एक्टिव ग्रुप ने नाश्ते का स्टॉल लगाया है। यहां भक्तों को जलेबी और भजिए परोसे जा रहे हैं। इसके अलावा भी कई छोटे-बड़े संस्थान, स्कूल कॉलेज और कोचिंग क्लासेस द्वारा ज्यूस और चाय बांट रहे हैं।

3 साल से मंदिर प्रांगण में भी भक्तों के लिए भंडारा हो रहा

दादाजी मंदिर प्रांगण में रोजाना दोनों समय लंगर लगता है। सेवादार महेंद्र अग्रवाल के मुताबिक, इस भंडारे से मंदिर के सेवादार, पुलिसकर्मी और निशान लाने वाले भक्तों को आसानी से भोजन प्रसादी मिल जाती है। यहां भक्तों को बैठाकर खिचड़ा, कड़ी और रोटी दे रहे हैं।

वहीं, इस बार बूंदी साढ़े 12 ‎‎क्विंटल बेसन, 140 डिब्बे‎ घी, 25 क्विंटल शकर से पांच‎ भटि्टयों पर तैयार की गई है। इसके अलावा तीन‎ दिन‎ भोजन प्रसादी के लिए 20‎ क्विंटल आटे की पुड़ी,‎ 115 ‎क्विंटल चावल, 5‎ क्विंटल मूंग की दाल और‎ 25 डिब्बे घी से‎ हलवा‎ तैयार किया गया है।

चिकित्सा मित्र बांट रहे साड़ियां-खिलौने

ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले डॉक्टरों ने भी चिकित्सा मित्र नाम से एक ग्रुप बनाया है। यह ग्रुप पिछले पांच साल से बच्चों को खिलौने बांट रहा है। बच्चों के लिए पानी की बोतल, पेन-कॉपी और किताबों सहित स्कूल बैग का वितरण भी कर रहा है। यहां तक की महिलाओं को साड़ियां भी बांटी जा रही है। ग्रुप में 30 सदस्य हैं।

दादा दरबार से लेकर पूरा शहर बाजारवाद से परे है

सीनियर जर्नलिस्ट मनीष जैन ने बताया कि गुरु पूर्णिमा महोत्सव पर यह पवित्र स्थान आज भी बाजारवाद से परे है। इतने बड़े पर्व के दौरान भी दादाजी भक्त व्यापार नहीं करते। गुरुपूर्णिमा पर लाखों भक्तों के लिए पलक पांवड़े बिछाते हैं। दादा दरबार में प्रसाद बिकता नहीं है। यहां पंडे-पुजारी का कोई स्थान ही नहीं है।

यहां खास हो या आम अपने हाथों से धूनी में हवन कर सकता है। समाधि को स्पर्श कर सकता है। दादाजी के यहां चंदा नहीं मांगा जाता, यहां किसी का नाम नहीं लिखाता। कई मामलों में दादा दरबार को छोटे दादाजी ने सालों पहले ही मुक्त कर दिया था। दरबार के संचालन का विधान उन्होंने खुद 1935 में बनाया और लिखवाया भी। आज भी मंदिर का ट्रस्ट उसके पालन का प्रयास करता है।

Share This Article
Leave a Comment
WordPress Market MedKit – Health & Medical Elementor Template Kit MEDO – Medical Delivery Startup Elementor Template Kit Medova – Health & Medical WordPress Theme Medunit | Psychology & Health Care WordPress Theme MedUp – Medical SaaS Elementor Template Kit Meduvid – Medical & Dental Clinic Elementor Template Kit MedXtore – Responsive Multipurpose Elementor WooCommerce WordPress Theme Medyplus – Medical, Clinic Template Kit MEE – Responsive Resume / Personal Portfolio Meeek – Link in Bio SaaS (WordPress)