वन क्षेत्र में बाघ की दस्तक : पैरों के निशान मिले, ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील

Admin
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रायगढ़

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में बढ़ते जंगली हाथियों के बाद अब यहां के जंगलों में बाघ की धमक होने की बात सामने आई है और इसको लेकर धरमजयगढ़ वन मंडल द्वारा गांव वालों को अलर्ट करते हुए, जिस जगह बाघ आने की सूचना मिली है, आसपास के जंगलों में बाकायदा सर्चिंग की जा रही है। बाघ आने की आहट छाल के जंगलों से मिली है, जहां के ग्रामीणों ने बड़े पांव के निशान मिलने के बाद वन विभाग को सूचना दी थी। छाल के जंगलों में बाघ की धमक के बाद एक दर्जन से भी अधिक गांवों में मुनादी के जरिए गांव वालों को अलर्ट करते हुए कहा जा रहा है कि जंगलों की तरफ जाने से बचें, चूंकि हाथियों के बाद अब यहां बाघ के आने की जानकारी मिली है।

वन विभाग ने कर दी पुष्टि
सप्ताह भर पहले छाल से लगे गांव हाटी से लगे साम्हरसिंघा में बाघ के पदचिह्नों की जानकारी मिली और यहां बाघ के पदचिह्नों के अलावा जंगली सूअर के भी पांव के निशान मिले थे। ग्रामीणों ने जब पास के वन विभाग कर्मियों को इसकी सूचना दी तब जांच करते हुए उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि जो पंजों के निशान मिले हैं वो बाघ के ही हैं और इसकी पुष्टि होने के बाद छाल रेंज के वन कर्मियों ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी।

हाथी के बाद अब बाघ से दहशत
रायगढ़ जिले के रायगढ़ वन मंडल एवं धरमजयगढ़ वन मंडल में पहले से ही कई दर्जन गांव में जंगली हाथियों की बढ़ती संख्या से उनके आतंक के कारण गांव के लोग दहशत में हैं और अब बाघ की धमक होने से यह दहशत और बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि हाथियों के चलते गांव के लोग पहले रतजगा करते थे और अब बाघ के आने से वे वन विभाग से सहयोग की उम्मीद करते हुए सुरक्षा के उपाय तलाश रहे हैं। इतना ही नहीं, बाघ की दहशत के चलते गांव के ग्रामीण अपने मवेशियों को जंगल भेजने से भी कतरा रहे हैं और सड़क किनारे चराते नजर आ रहे हैं।

क्या कहते हैं डीएफओ
रायगढ़ जिले के जंगलों में शेर की आमद के बाद वन विभाग अलर्ट मोड में है। इस संबंध में धरमजयगढ़ वन मंडल के डीएफओ जितेन्द्र कुमार उपाध्याय का कहना है कि बाघ के मूवमेंट पर लगातार निगरानी रखने के लिए 6 अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। हाल ही में इसकी पहली जानकारी छाल के जंगलों में मिले पदचिह्नों से हुई थी और अब लैलूंगा के जंगलों में भी इसके पैरों के निशान मिले हैं, जिसके कारण आसपास के गांव में मुनादी के जरिए गांव वालों को अलर्ट किया गया है। उन्होंने इस बात को माना कि जिले में लैलूंगा व छाल घने जंगल बचे हुए हैं, जिसके कारण बाघ के आने की खबर सुखद है। जिन टीमों को इसके मूवमेंट पर नज़र रखने को कहा है, उन्हें इसकी सुरक्षा के लिए भी कहा गया है। चूंकि जंगलों में बाघ के घूमने के कारण गांव में मवेशियों के शिकार की संभावना ज़्यादा है। साथ ही साथ धरमजयगढ़ वन मंडल में बहुतायत मात्रा में हाथी अलग-अलग झुंड में विचरण कर रहे हैं, इसलिए बाघ के मूवमेंट पर नज़र रखना जरूरी हो गया है।

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