इस बार रक्षाबंधन पर लंबा मुहूर्त, सुबह से शुरू होगी शुभ घड़ी — जानें सही समय

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रक्षाबंधन 9 अगस्त शनिवार को मनाया जाएगा. इस बार रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए साढ़े 7 घंटे से अधिक का शुभ मुहूर्त है. लेकिन इसमें भी 1 घंटा 40 मिनट तक राखी नहीं बांधी जाएगी. इसका कारण भद्रा नहीं है क्योंकि इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं है. भद्रा रक्षाबंधन के दिन सूर्योदय से पहले ही खत्म हो जा रही है. इस बार का रक्षाबंधन भद्रा रहित मुहूर्त में है. राखी के त्योहार पर भद्रा न होने से रक्षाबंधन सुबह से मनाया जाएगा. फिर रक्षाबंधन के शुभ मुहर्त में 1 घंटा 40 मिनट की रोक क्यों होगी? आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में.
रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

9 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 47 मिनट से शुरू है. यह शुभ मुहूर्त दोपहर में 1 बजकर 24 मिनट तक रहेगा. यानि रक्षाबंधन सुबह से लेकर दोपहर तक मनाया जाएगा. इस दिन राखी बांधने के लिए 7 घंटे मिनट का शुभ समय प्राप्त हो रहा है.
सावन पूर्णिमा को मनाते हैं रक्षाबंधन

हिंदू कैलेंडर के अनुसार सावन पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनाते हैं. इस साल सावन पूर्णिमा 8 अगस्त को ​2:12 पीएम से लेकर 9 अगस्त को 1:24 पीएम तक है. इस दिन भगवान शिव के प्रिय माह सावन का समापन होता है. रक्षाबंधन सावन के अंतिम दिन होता है और यह बड़ा त्योहार होता है. रक्षाबंधन के दिन बहनें भाइयों को राखी बांधती हैं और उनके सुखी जीवन की कामना करती हैं. भाई भी बहनों को उपहार देते हैं और उसकी सुरक्षा का वचन देते हैं.
1 घंटा 40 मिनट तक नहीं बांधी जाएगी राखी!

रक्षाबंधन के लिए सुबह मुहूर्त सुबह 5:47 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक है. लेकिन इस शुभ मुहूर्त में ही राहुकाल भी पड़ रहा है. रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त में राहुकाल 1 घंटा 40 मिनट तक है. राहुकाल के समय में राखी नहीं बांधी जाती है क्योंकि इसे अशुभ समय मानते हैं. रक्षाबंधन के दिन राहुकाल सुबह में 9 बजकर 7 मिनट से सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक है. राहुकाल में बहनें अपने भाइयों को राखी नहीं बांधनी चाहिए.
राहुकाल में शुभ कार्य क्यों नहीं करते हैं?

राहुकाल में अशुभ और छाया ग्रह राहु का प्रभाव होता है. ज्योतिष में राहु को भ्रम, दुर्भाग्य, क्लेश, भय का कारक माना गया है. एक दिन में राहुकाल 90 मिनट का होता है. कई बार यह कम या उससे ज्यादा हो सकता है.

राहुकाल को अशुभ, भ्रमकारी और विघ्न पैदा करने वाला होता है. पंचांग में राहुकाल को शुभ कार्यों, पूजन, यात्रा, लेन-देन, नई शुरुआत, मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित माना गया है. इस वजह से राहुकाल में शुभ कार्य नहीं करते हैं.

 

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