‘नफरत फैलाने वाले पोस्ट पर लगे लगाम, लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी बनी रहे’, हेट स्पीच पर SC का केंद्र-राज्यों को निर्देश

Admin
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नई दिल्ली

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ हेट स्पीच मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है. शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ FIR दर्ज कराने वाले वजाहत खान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने लोगों के लिए भी सोशल मीडिया पोस्ट पर गाइडलाइन की जरूरत बताई. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिक खुद संयम क्यों नहीं रख सकते?

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मोल समझना चाहिए. अगर वे ऐसा नहीं करेंगे, तो राज्य हस्तक्षेप करेगा. कोई नहीं चाहता कि राज्य हस्तक्षेप करे. उचित प्रतिबंध सही हैं, यह 100% पूर्ण अधिकार नहीं हो सकता, लेकिन नागरिक इस स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर रहे हैं. वे बस एक बटन दबाते हैं और सब कुछ ऑनलाइन पोस्ट हो जाता है. ऐसे मामलों से क्यों अदालतें पटी पड़ी हैं? नागरिकों के लिए क्यों ना दिशा निर्देश हों?

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तीन अन्य राज्यों में वजाहत खान को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण की अवधि बढ़ा दी. खान को पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अन्य राज्यों में दर्ज एफआईआर पर कार्रवाई पर रोक लगा दी थी 

जस्टिस बीवी नागरत्ना ने अमेरिका का दिया उदाहरण

जस्टिस बी वी नागरत्ना ने नागरिकों के लिए नियमन और दिशा-निर्देश बनाने की वकालत की और केंद्र तथा राज्य सरकारों से इस पर विचार करने को कहा. जस्टिस नागरत्ना ने अमेरिका का उदाहरण दिया, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ बोलने की विषय-वस्तु पर भी ध्यान दिया जाता है. जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि राय रखना एक बात है, लेकिन उसे किसी खास तरीके से कहना एक दुरुपयोग है. कभी-कभी यह अभद्र भाषा के संदर्भ में अदालत में नहीं आएगा. नागरिकों के बीच भाईचारा होना चाहिए, तभी यह सारी नफ़रत कम होगी. 

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के अलावा दूसरे राज्यों में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी. आरोपी वजाहत खान ने अपने खिलाफ कई राज्यों में दर्ज मुकदमों को एक जगह ट्रांसफर किए जाने की मांग की है. वजाहत खान के खिलाफ असम , पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली में एफआईआर दर्ज की गई है.

शर्मिष्ठा पनोली का क्या है मामला

कोलकाता पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर गुरुग्राम से शर्मिष्ठा पनोली को गिरफ्तार किया था. सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर पर आरोप है कि उसने सांप्रदायिक टिप्पणियों वाला एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें दावा किया गया था कि बॉलीवुड अभिनेता ऑपरेशन सिंदूर पर चुप्पी साधे हुए हैं. इसके बाद कोलकाता की एक अदालत ने पनोली को 13 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था.

सोशल मीडिया ‘कंटेंट क्रिएटर' शर्मिष्ठा पनोली की गिफ्तारी ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी थी. कई लोग उसकी गिरफ्तारी को जायज ठह रहे थे तो कई नाजायज. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कई लोग शर्मिष्ठा के समर्थन में नजर आए तो कुछ उनके खिलाफ. कंटेंट क्रिएटर की गिरफ्तारी पर बंगाल सरकार और पुलिस दोनों की आलोचना भी हुई. आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने भी पश्चिम बंगाल पुलिस से सोशल मीडिया ‘कंटेंट क्रिएटर' शर्मिष्ठा पनोली के मामले में "न्यायसंगत" कार्रवाई करने की अपील की थी. इस मामले में जमकर सियासत भी हुई.

बेंच ने कहा कि नफरती भरे भाषणों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है, लेकिन ये भी सुनिश्चित करने की जरूरत होगी कि किसी की भी बोलने की आजादी को कुचला न जाए. लोगों को भी अभिव्यक्ति की अधिकार का महत्व समझना चाहिए. यह अधिकार बेशकीमती है.

बेंच ने कहा कि लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मूल्य समझना चाहिए. राज्य को हर बार बीच में आकर कार्रवाई करनी पड़े, ये स्थिति नहीं होनी चाहिए. हेट स्पीच जैसे कंटेंट पर कुछ नियंत्रण ज़रूरी है. आम नागरिकों को भी ऐसे कंटेंट को शेयर करने, प्रमोट या लाइक करने से बचना चाहिए. 

वजहात खान को कोर्ट से मिली राहत 

वजहात खान के वकील ने कोर्ट में पुराने ट्वीट्स के लिए माफी मांगी. वकील ने कहा कि मेरी शिकायत ही मेरे लिए मुश्किल बनते जा रही है. मैंने इसके लिए माफी मांग ली है. लेकिन मैं बस यही चाहता हूं कि कोर्ट देखे कि FIR वाकई उन्हीं ट्वीट्स से जुड़ी है या नहीं.

कोर्ट ने कहा कि हर बार नया FIR और जेल में डालने का क्या मतलब है? इससे कोई समाधान नहीं निलकलेगा.

कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि अब पोस्ट डिलीट करने का कोई मतलब नहीं है, एक बार जो इंटरनेट पर चीजें डल जाती हैं वो हमेशा के लिए रहती हैं. अभिव्यक्ति की आजादी बहुत ही अहम मौलिक अधिकार है. लेकिन इसका दुरुपयोग करने से बस अदालतों में भीड़ बढ़ती है. 

पिछली सुनवाई में क्या हुआ?

24 जून को हुई पिछली सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एजी विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने केंद्र सरकार और असम, दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल की राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया था. यह नोटिस वजाहत खान की याचिका पर दिया गया था, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज सभी FIR को एक साथ जोड़ने की मांग की गई.

वजाहत खान पर क्या आरोप हैं?

वजाहत खान पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट किए जो कथित तौर पर धार्मिक घृणा और साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ावा देते हैं. उनके खिलाफ कई राज्यों में FIR दर्ज हुई हैं. 9 जून को वजाहत खान को गिरफ्तार किया गया था. एक FIR में वे पुलिस हिरासत में हैं और दूसरी FIR में न्यायिक हिरासत में.

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