बीटेक स्टूडेंट्स ने रचा इतिहास, IIT इंदौर में 1 करोड़ के पैकेज पाने वाले पांच छात्र

Admin
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इंदौर
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर से बैचलर ऑफ टेक्नोलाजी (बीटेक) करने वाले पांच छात्रों को एक-एक करोड़ रुपये से अधिक के सालाना पैकेज पर नौकरियां मिली हैं। संस्थान के इतिहास में यह पहला मौका है, जब बैच के इतने सारे विद्यार्थियों को एक-एक करोड़ रुपये का पैकेज मिला है। इन्हें आईटी सेक्टर की कंपनियों ने जाब ऑफर किए हैं। खास बात यह है कि पिछले साल आईटी सेक्टर की स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद आईआईटी के विद्यार्थियों को अच्छे पैकेज पर कंपनियों ने रखा है। संस्थान के मुताबिक बीते साल सिर्फ एक विद्यार्थी यहां तक पहुंचा था, जबकि इस बार न्यूनतम पैकेज में भी बढ़ोतरी हुई है। एक दिसंबर 2024 से संस्थान में प्लेसमेंट का दौर शुरू हुआ है। कंपनियों का कैंपस में आना अभी जारी है। प्लेसमेंट सीजन में 150 से ज्यादा प्रमुख टेक कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) ने हिस्सा लिया है। निदेशक प्रो. सुहास जोशी ने बताया संस्थान में आने वाली कंपनियों की संख्या में वृद्धि हुई है।
 
इन क्षेत्रों की कंपनियों ने दिए जॉब
कोर इंजीनियरिंग फर्म के अलावा आइटी, आटोमोबाइल, ऊर्जा और पर्यावरण, परामर्श, फिनटेक, बैंकिंग, सेमीकंडक्टर, कंस्ट्रक्शन से कंपनियों ने अधिक जॉब ऑफर दिए हैं।

पैकेज में 18 फीसद की वृद्धि
बीटेक करने वाले विद्यार्थियों को 500 आफर मिले, जिसमें अभी तक 88 प्रतिशत छात्रों को नौकरियां मिल गई हैं। पिछले वर्ष की तुलना में जाब आफर में उच्चतम सैलरी पैकेज में 18 फीसद की वृद्धि हुई है। पहली बार पांच विद्यार्थियों को एक-एक करोड़ की नौकरियां मिली हैं। औसत सैलरी में भी 13 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। यह 27 लाख रुपये प्रति वर्ष तक पहुंच गई।

क्यूएस रैंकिंग सुधारने में लगेंगे पांच साल
विद्यार्थियों को एक-एक करोड़ के जाब आफर जरूर मिले हैं लेकिन आईआईटी इंदौर की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है। क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में संस्थान को 556वां स्थान मिला है, जबकि वर्ष 2023 में यह 396वें स्थान पर था। बीते चार साल में रैंकिंग में 160 स्थानों की गिरावट आई है। आईआईटी इंदौर ने 34 देशों के साथ 118 एमओयू किए हैं और यहां तीन हजार से अधिक विद्यार्थी तथा 220 फैकल्टी सदस्य हैं, लेकिन इसके बावजूद यह संस्थान अंतरराष्ट्रीय मानकों पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया है।

निदेशक प्रो. सुहास जोशी ने माना है कि समस्या की पहचान हो चुकी है और सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि रिसर्च आउटपुट, पेटेंट और इनोवेशन पर अब विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संस्थान ने नई रणनीतियों पर काम शुरू किया है, जिसका असर दिखने में दो से पांच साल का समय लग सकता है। रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना, वैश्विक साझेदारी और छात्र विनिमय कार्यक्रम बढ़ाना इन प्रयासों का हिस्सा है।

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