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शौर्य चक्र : ग्वालियर के सुशील कुमार शर्मा का नाम केंद्रीय प्रशासनिक अभिकरण ने रेलवे बोर्ड को गृह मंत्रालय को भेजने का आदेश दिया

Admin
10 Min Read

ग्वालियर

 मुंबई 26/11 आतंकी हमले के दौरान सैंकड़ों यात्रियों के रक्षक बने एसीटीआई सुशील शर्मा को 17 सालों तक चले लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब एक शहीद का दर्जा मिलेगा. सुशील शर्मा को शहीद का दर्जा देने से इनकार करने के बाद परिवार ने संघर्ष किया और अब 17 सालों बाद अब उन्हें गैलेंट्री अवॉर्ड से नवाजा जाएगा.
 ग्वालियर के सुशील कुमार शर्मा जो 26/11 मुंबई आतंकी हमले में शहीद हो गए थे, उन्हें अब शौर्य चक्र मिल सकता है। केंद्रीय प्रशासनिक अभिकरण (कैट) ने रेलवे बोर्ड को आदेश दिया है कि सुशील कुमार शर्मा का नाम गृह मंत्रालय को भेजा जाए। कैट ने यह भी कहा है कि रेलवे सुशील के परिवार को 5 लाख रुपये दे और इस प्रक्रिया को 6 महीने में पूरा करे। इस प्रक्रिया को एक्शन में आने में 17 साल लग गए।

बात 26 नवंबर 2008 को मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस की है। यहां पर पाकिस्तान से आए आतंकियों ने हमला किया था। सुशील कुमार शर्मा उस समय ड्यूटी के बाद कंट्रोल ऑफिस जा रहे थे। तभी वहां फायरिंग शुरू हो गई। रेलवे की रिपोर्ट के अनुसार, ऑफिस के लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन सुशील लोगों की जान बचाने में लग गए। इस दौरान उन्हें दो गोलियां लगीं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। कैट ने माना कि सुशील ने लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान दे दी। यह एक असाधारण वीरता का काम है।

शौर्य चक्र के लिए मांगा नाम
कैट ने रेलवे बोर्ड को निर्देश दिया है कि असिस्टेंट चीफ टिकटिंग इंस्पेक्टर सुशील कुमार शर्मा के नाम की सिफारिश शौर्य चक्र पुरस्कार के लिए करें। साथ ही गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजें। कैट ने गृह मंत्रालय से यह भी कहा है कि वे इस मामले पर गंभीरता से विचार करें। अगर जरूरत हो तो विशेष स्वीकृति लें, ताकि देश की सेवा में शहीद हुए कर्मचारी को उचित सम्मान मिल सके।

परिवार को आर्थिक सहायता
कैट ने सुशील के परिवार को पांच लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि देने का भी आदेश दिया है। साथ ही, यह भी कहा है कि पूरी प्रक्रिया को 180 दिनों के अंदर पूरा किया जाए। सुशील शर्मा पटेल नगर के रहने वाले थे। रेलवे ने अपनी रिपोर्ट में सुशील शर्मा की बहादुरी की तारीफ तो की, लेकिन समय पर उनका नाम वीरता पुरस्कार के लिए नहीं भेजा। 2010 में उनकी पत्नी रागिनी शर्मा और अन्य परिजनों ने कैट में अर्जी दी। 16 नवंबर 2010 को कैट ने रेलवे को नाम भेजने और उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया। लेकिन रेलवे ने इस आदेश का पालन नहीं किया।

रेलवे का कहना
2011 में अवमानना याचिका पर रेलवे ने जवाब दिया कि उनका नाम निरस्त कर दिया गया है। इसके बाद 2012 में परिजन फिर से कैट गए। 21 जून 2025 को कैट ने पाया कि रेलवे ने 2011 में नाम भेजा था। लेकिन एक बदले हुए आदेश में कहा गया कि उनकी मृत्यु आतंकियों से लड़ते हुए नहीं हुई थी।

कैट ने बहादुरी का किया सम्मान
कैट के अनुसार, सुशील शर्मा ने जो किया वह बहुत ही बहादुरी का काम था। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाई। इसलिए उन्हें शौर्य चक्र मिलना चाहिए। कैट ने रेलवे बोर्ड और गृह मंत्रालय को इस मामले में तेजी से कार्रवाई करने का आदेश दिया है। ताकि सुशील शर्मा को मरणोपरांत यह सम्मान मिल सके।

आतंकी कसाब ने मुंबई 26/11 आतंकी हमले में सैकड़ों की ले ली थी जान

उल्लेखनीय है मुंबई आतंकी हमलों की तारीख याद करते आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं. उस दिन के खौफनाक मंजर को  मुंबई सहित पूरा देश कभी नहीं भुला पाएगा. समुद्र के रास्ते पाकिस्तान से मुंबई आए आतंकी कसाब ने अपने 10 आतंकियों के साथ  मुंबई में होटल ताज और सीएसीट रेलवे स्टेशन समते कई स्थानों पर हमले किए थे, सैकड़ों लोगों की जान गई थी.

आतंकी हमले में होटल ताज़ और सीएसटी स्टेशन का मुख्य निशाना बनाया गया

26/11 आतंकी हमले में आतंकियों ने होटल ताज़ और सीएसटी सहित कई मुख्य निशाना बनाया था. इस हमले में अनेक सैंकड़ों की जान गई थी, उनमें ग्वालियर के सुशील कुमार शर्मा भी थे. घटना के समय सुशील शर्मा मुंबई सीएसटी रेलवे स्टेशन पर बतौर सहायक मुख्य टिकट निरीक्षक (डिप्टी सीटीआई) की ड्यूटी कर रहे थे.

सुशील शर्मा, उस समय भी अडिग खड़े रहे जब आतंकी हमले के दौरान सीएसटी स्टेशन पर अफरा तफरी का माहौल था. चारों ओर गोलियां बरस रही थी, लेकिन सुशील ने पैसेंजर्स की जान बचाने के लिए कंट्रोल रूम से बाहर आए और सैकड़ों यात्रियों की जान बचाने में कामयाब हुए थे.

आतंकियों की दो गोली ने ले ली थी मुख्य टिकट निरीक्षक सुशील शर्मा की जान

विषम परिस्थितियों में अपने जान की परवाह नहीं करते हुए निर्दोषों की जान बचाकर वीरता का प्रदर्शन करने वाले बहादुर अफसर सुशील शर्मा को उनकी शहादत के लिए इनाम नहीं मिला था, क्योंकि वे वदीर्धारी नहीं, बल्कि रेलवे अधिकारी थे. परिजनों ने सरकार से सुशील की वीरता के लिए शहीद का दर्जा देने की मांग की, लेकिन तब उनकी बात नहीं सुनी गई. 

 कैट ने आदेश में शहीद मानते हुए सुशील को गेलेंट्री अवार्ड देने के दिए निर्देश

सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन ट्रिब्यूनल (कैट) में सुशील शर्मा को शहीद का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर पहुंचे परिजनों को लम्बी लड़ाई लड़नी पड़ी और अब घटना के 17 साल बाद कैट ने भारत सरकार को दिए अपने आदेश में सुशील को शहीद मानते हुए उन्हें गेलेंट्री अवार्ड में देने के निर्देश दिए है.

मुख्य टिकट निरीक्षक रहे सुशील शर्मा आतंकी हमले के समय कार्यालय से निकलकर कंट्रोल रूम पंहुचे और प्लेटफार्म पर आने वाली कई ट्रेन को स्टेशन से बाहर ही रोकने का एनाउंसमेंट किया, जिससे सैकड़ों पैसेंजर की जान बच गई, लेकिन वो आंतिकियों की गोली का शिकार बन गए.

सुशील शर्मा के परिजनों ने साल 2010 में खटखटाया था कैट का दरवाजा

मुंबई आतंकी हमले में आंतकियों को गोली खाकर मिसाल बने सुशील शर्मा को शहादत के दो वर्ष की समय-सीमा पूरा होने के बाद जब शहीद का दर्जा नहीं मिला तो ग्वालियर के सिटी सेंटर पटेल नगर स्थित ग्रीन गार्डन स्टेट में रहने वाले सुशील शर्मा के परिजन साल 2010 में कैट का दरवाजा खटखटाया था.

कैट ने पहले भी सुशील शर्मा को गेलेंट्री अवार्ड देने का दिया था आदेश

साल 2010 में सुशील को शहीद का दर्जा दिए जाने को लेकर कैट पहुंचे उनके परिजनों को तब कैट ने गेलेंट्री अवार्ड देने का आदेश दिया था, लेकिन रेलवे की तरफ से समय रहते कोई जवाब नहीं दिया, जिससे वो इस सम्मान से वंचित रह गए. साल 2011 में परिजनों ने कटेंम्ट फाइल किया और तीन दिन पहले कैट ने गेलेंट्री अवार्ड देने का आदेश जारी कर दिया.

कैट के निर्णय के बाद सुशील शर्मा के परिवार में हर्ष का माहौल हैं. उनके भाई एमके शर्मा का कहना हैं कि ग्वालियर चंबल का सपूत कभी डरता नहीं हैं, चाहे वह नागरिक के रूप  में हो या फिर फौजी वेश में. कैट के आदेश से भाई जिस सम्मान के हकदार थे वह अब उन्हें मिल सकेगा.

रेलवे ने सुशील शर्मा की पत्नी रागिनी शर्मा को दी थी अनुकंपा नियुक्ति

रेलवे ने मुंबई आंतकी हमले में सुशील शर्मा की मौत के बाद रेलवे ने उनकी पत्नी रागिनी शर्मा को अनुकंपा नियुक्ति दी थी, जो करीब 15 साल की सेवा करने के बाद पिछले माह 30 जून को सेवानिवृत्त हुईं. अनुकम्पा नियुक्ति के समय रेलवे ने पत्नी को 10 लाख रुपए बतौर क्षतिपूर्ति के दिए थे, लेकिन ताजा आदेश के बाद अब रेलवे को उन्हें शेष 5 लाख रुपए भी देने होंगे.

सुनवाई के दौरान रेलवे भी सुशील शर्मा की मृत्यु को वीरता बताया था

सुशील शर्मा को शहीद का दर्जा दिलाने के लिए कैट में परिजनों का मुक़दमा लड़ने वाले एडवोकेट आलोक शर्मा ने बताया कि मुंबई आतंकी हमले के समय पैसेंजर्स की जान बचाने के दौरान आंतकियों की गोली लगने से उनकी मृत्यु हुई थी. केस की सुनवाई के दौरान रेलवे भी सुशील शर्मा की मृत्यु को वीरता बताया था.

Somesh Sharma

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